Bhairav Chalisa

The Bhairav Chalisa is a Hindu devotional hymn dedicated to Lord Kaal Bhairav, a fierce and powerful manifestation of Lord Shiva. Devotees recite it with faith to seek protection from fear and negative influences, overcome obstacles, gain inner strength, and invoke the divine blessings of Kaal Bhairav.

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Bhairav Chalisa
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Introduction

भैरव चालीसा केवल भगवान काल भैरव की स्तुति नहीं है, बल्कि यह साहस, शक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक दृढ़ता का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ भय और नकारात्मकता से मुक्ति, जीवन की बाधाओं को दूर करने तथा भगवान काल भैरव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं। भगवान शिव के उग्र स्वरूप माने जाने वाले काल भैरव की आराधना भक्त के भीतर निर्भयता और आत्मबल जागृत करने में सहायक मानी जाती है।

Sacred Verses Lyrics & Meaning

1
श्री गणपति गुरु गौरी पद
प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वंदन करो
श्री शिव भैरवनाथ ॥
2
श्री भैरव संकट हरण
मंगल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु
लोचन लाल विशाल ॥
3
जय जय श्री काली के लाला ।
जयति जयति काशी-कुतवाला ॥
4
जयति बटुक-भैरव भय हारी ।
जयति काल-भैरव बलकारी ॥
5
जयति नाथ-भैरव विख्याता ।
जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥
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6
भैरव रूप कियो शिव धारण ।
भव के भार उतारण कारण ॥
7
भैरव रव सुनि हवै भय दूरी ।
सब विधि होय कामना पूरी ॥
8
शेष महेश आदि गुण गायो ।
काशी-कोतवाल कहलायो ॥
9
जटा जूट शिर चंद्र विराजत ।
बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥
10
कटि करधनी घुंघरू बाजत ।
दर्शन करत सकल भय भाजत ॥
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11
जीवन दान दास को दीन्ह्यो ।
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥
12
वसि रसना बनि सारद-काली ।
दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥
13
धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।
जय मनरंजन खल दल भंजन ॥
14
कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा ।
कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा ॥
15
जो भैरव निर्भय गुण गावत ।
अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥
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16
रूप विशाल कठिन दुख मोचन ।
क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥
17
अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।
बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥
18
रुद्रकाय काली के लाला ।
महा कालहू के हो काला ॥
19
बटुक नाथ हो काल गंभीरा ।
श्‍वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥
20
करत नीनहूं रूप प्रकाशा ।
भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥
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21
रत्‍न जड़ित कंचन सिंहासन ।
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥
22
तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं ।
विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥
23
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।
जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥
24
भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय ।
वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥
25
महा भीम भीषण शरीर जय ।
रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥
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26
अश्‍वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।
स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय ॥
27
निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय ।
गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥
28
त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय ।
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥
29
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥
30
रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर ।
चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥
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31
करि मद पान शम्भु गुणगावत ।
चौंसठ योगिन संग नचावत ॥
32
करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।
काशी कोतवाल अड़बंगा ॥
33
देयं काल भैरव जब सोटा ।
नसै पाप मोटा से मोटा ॥
34
जनकर निर्मल होय शरीरा ।
मिटै सकल संकट भव पीरा ॥
35
श्री भैरव भूतों के राजा ।
बाधा हरत करत शुभ काजा ॥
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36
ऐलादी के दुख निवारयो ।
सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥
37
सुन्दर दास सहित अनुरागा ।
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥
38
श्री भैरव जी की जय लेख्यो ।
सकल कामना पूरण देख्यो ॥
39
जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार ।
कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार ॥

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  • Removes Fear / भय को दूर करने में सहायक

    श्रद्धा और भक्ति से भैरव चालीसा का पाठ करने से भय कम होने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए साहस एवं आत्मबल प्राप्त होने की मान्यता है।

  • Protects from Negative Influences / नकारात्मक प्रभावों से रक्षा

    नियमित रूप से भैरव चालीसा का पाठ करने से भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा होने की मान्यता है।

  • Removes Obstacles / बाधाओं को दूर करने में सहायक

    भैरव चालीसा का पाठ जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करने तथा उनसे आगे बढ़ने में सहायक माना जाता है।

  • Brings Peace of Mind / मानसिक शांति प्रदान करता है

    भक्ति भाव से भैरव चालीसा का पाठ करने से मन की चंचलता और बेचैनी कम होकर मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक स्थिरता का अनुभव होने की मान्यता है।

  • Gives Strength and Courage / शक्ति और साहस प्रदान करता है

    भगवान भैरव को भगवान शिव के शक्तिशाली और निर्भय स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। उनकी चालीसा का पाठ भक्त के भीतर साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

  • Helps in Overcoming Difficulties / कठिनाइयों से उबरने में सहायक

    नियमित रूप से भैरव चालीसा का पाठ करने से कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और दृढ़ता के साथ करने के लिए आंतरिक शक्ति एवं विश्वास प्राप्त होने की मान्यता है।

  • Brings Lord Bhairav’s Grace / भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है

    भक्त भगवान काल भैरव के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने तथा उनकी कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भैरव चालीसा का पाठ करते हैं।

भैरव चालीसा पाठ की विधि और नियम भगवान काल भैरव की आराधना में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भाव है। सामान्य रूप से भैरव चालीसा का पाठ करने के लिए किसी कठिन या विशेष नियम का पालन करना आवश्यक नहीं है। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार इसका पाठ कर सकते हैं। 1. स्नान करके पाठ करें संभव हो तो सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि सुबह पाठ करना संभव न हो, तो दिन के किसी भी शांत समय में श्रद्धा के साथ भैरव चालीसा का पाठ किया जा सकता है। 2. स्वच्छ स्थान पर बैठें भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र के सामने स्वच्छ स्थान पर आसन लगाकर बैठें। पूजा के स्थान को भी साफ और व्यवस्थित रखें। 3. दीपक और धूप जलाएं पाठ से पहले भगवान भैरव के सामने दीपक और धूप जला सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार पुष्प आदि भी अर्पित किए जा सकते हैं। 4. भगवान भैरव का ध्यान करें चालीसा का पाठ शुरू करने से पहले कुछ क्षण भगवान काल भैरव का ध्यान करें। मन को शांत करके श्रद्धा और भक्ति के साथ उनका स्मरण करें और फिर चालीसा का पाठ आरंभ करें। 5. पाठ ध्यानपूर्वक करें भैरव चालीसा का पाठ जल्दबाजी में न करें। प्रत्येक पंक्ति को ध्यान और श्रद्धा के साथ पढ़ें तथा भगवान भैरव के स्वरूप और महिमा का स्मरण करें। 6. नियमित रूप से पाठ करें यदि संभव हो तो प्रतिदिन एक निश्चित समय पर भैरव चालीसा का पाठ करें। नियमित पाठ से मन में अनुशासन और भक्ति का भाव मजबूत होता है। 7. शनिवार और भैरव अष्टमी पर विशेष पाठ धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार और काल भैरव जयंती, जिसे भैरव अष्टमी भी कहा जाता है, भगवान भैरव की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। इन अवसरों पर भक्त विशेष पूजा और चालीसा पाठ करते हैं। 8. शुद्ध और सकारात्मक भाव रखें पाठ के समय मन में श्रद्धा, विनम्रता और सकारात्मक भाव रखना चाहिए। भगवान से अपने तथा दूसरों के कल्याण, सुख और शांति की प्रार्थना करना उचित माना जाता है। 9. पाठ के बाद प्रार्थना करें भैरव चालीसा का पाठ पूरा करने के बाद भगवान काल भैरव से अपने और अपने परिवार के सुख, शांति, सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना करें। विशेष ध्यान दें: भैरव साधना के कुछ विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों के अलग और कठिन नियम हो सकते हैं। लेकिन सामान्य भक्ति के रूप में भैरव चालीसा का पाठ करने के लिए ऐसे कठिन नियम आवश्यक नहीं हैं। श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भाव से किया गया पाठ ही मुख्य माना जाता है।

Frequently Asked Questions

भैरव चालीसा का पाठ भगवान काल भैरव की आराधना, उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने तथा जीवन के भय, संकट और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा से इसका पाठ करने से भक्त को साहस और आत्मबल प्राप्त होता है।

भैरव चालीसा का पाठ सुबह स्नान के बाद या दिन के किसी भी शांत समय में किया जा सकता है। शनिवार और भैरव अष्टमी को भगवान भैरव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए इन दिनों पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

हाँ, सामान्य भक्ति के रूप में भैरव चालीसा का पाठ रात में भी किया जा सकता है। भगवान भैरव की आराधना से जुड़ी विशेष रात्रि साधनाओं के नियम अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्य चालीसा पाठ के लिए ऐसा कोई कठोर नियम आवश्यक नहीं है।

हाँ, भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार प्रतिदिन भैरव चालीसा का पाठ कर सकते हैं। नियमित पाठ से भक्ति, आत्मविश्वास और मन की स्थिरता बढ़ाने में सहायता मिलने की मान्यता है।

हाँ, सामान्य भक्ति के रूप में महिलाएँ भी श्रद्धा और भक्ति के साथ भैरव चालीसा का पाठ कर सकती हैं। केवल विशेष तांत्रिक साधनाओं के नियम अलग हो सकते हैं।

नहीं, सामान्य रूप से भैरव चालीसा का पाठ करने के लिए कोई विशेष पूजा अनिवार्य नहीं है। स्वच्छ स्थान पर बैठकर भगवान भैरव का ध्यान और स्मरण करते हुए श्रद्धा से चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

भैरव चालीसा के पाठ की कोई एक अनिवार्य संख्या नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार एक बार या अपनी सुविधा के अनुसार अधिक बार पाठ कर सकते हैं। नियमितता और भक्ति को संख्या से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान काल भैरव की आराधना भय और नकारात्मकता को दूर करने तथा भक्त के भीतर साहस और निर्भयता का भाव उत्पन्न करने में सहायक मानी जाती है।

हाँ, धार्मिक मान्यता के अनुसार भैरव चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों से उबरने में सहायता करता है तथा भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, भैरव चालीसा का पाठ घर पर स्वच्छ और शांत स्थान में भगवान भैरव का ध्यान करते हुए किया जा सकता है। इसके लिए मंदिर जाना अनिवार्य नहीं है।

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