Durga Chalisa

The Durga Chalisa is a revered Hindu devotional hymn dedicated to Goddess Durga and is traditionally attributed to the devotee-poet Devidas. Written in Awadhi-Hindi, this sacred Chalisa glorifies Maa Durga’s divine power, compassion, courage, and her role as the protector of devotees.

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Durga Chalisa
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Introduction

दुर्गा चालीसा केवल माँ दुर्गा की स्तुति नहीं है, बल्कि यह शक्ति, साहस और भक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम है। लाखों श्रद्धालु इसका पाठ मन की शांति पाने, भय और कठिनाइयों का सामना करने, नकारात्मकता से रक्षा पाने और माँ दुर्गा की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं। श्रद्धा और भक्ति से किया गया इसका पाठ भक्त के भीतर आत्मविश्वास, शक्ति और आध्यात्मिक स्थिरता का भाव जगाने में सहायक माना जाता है।

Sacred Verses Lyrics & Meaning

1
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
2
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥
3
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥
4
तुम संसार शक्ति लै कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
5
अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥
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6
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
7
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥
8
रूप सरस्वती को तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥
9
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भई फाड़कर खम्बा ॥
10
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥
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11
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥
12
क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥
13
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥
14
मातंगी अरु धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥
15
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥
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16
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥
17
कर में खप्पर खड्ग विराजै ।
जाको देख काल डर भाजै ॥
18
सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥
19
नगरकोट में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँलोक में डंका बाजत ॥
20
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥
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21
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
22
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥
23
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब ।
भई सहाय मातु तुम तब तब ॥
24
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब रहें अशोका ॥
25
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥
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26
प्रेम भक्ति से जो यश गावें ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥
27
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥
28
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥
29
शंकर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥
30
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥
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31
शक्ति रूप का मरम न पायो ।
शक्ति गई तब मन पछितायो ॥
32
शरणागत हुई कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
33
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥
34
मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥
35
आशा तृष्णा निपट सतावें ।
मोह मदादिक सब बिनशावें ॥
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36
शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥
37
करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥
38
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥
39
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥
40
देवीदास शरण निज जानी ।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
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41
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक ॥

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  • Brings Courage and Strength / साहस और शक्ति प्रदान करता है

    दुर्गा चालीसा का पाठ मन को मजबूत करने, साहस बढ़ाने और कठिन परिस्थितियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने में सहायक माना जाता है।

  • Removes Fear / भय दूर करता है

    भक्ति भाव से किया गया पाठ मन को शांत करने और भय एवं असुरक्षा की भावना से मुक्ति पाने में सहायक माना जाता है।

  • Protects from Negative Influences / नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है

    नियमित पाठ सकारात्मक आध्यात्मिक वातावरण बनाने और माँ दुर्गा की रक्षात्मक कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।

  • Brings Peace of Mind / मानसिक शांति प्रदान करता है

    दुर्गा चालीसा का पाठ अशांत विचारों को शांत करने और मन में एकाग्रता, शांति एवं भक्ति का भाव उत्पन्न करने में सहायक माना जाता है।

  • Removes Obstacles / बाधाएँ दूर करने में सहायक

    भक्त जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने तथा माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा से दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं।

  • Fulfills Devotees Wishes / मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक

    सच्ची श्रद्धा और प्रार्थना के साथ दुर्गा चालीसा का पाठ भक्तों की उचित मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।

  • Brings Positive Energy / सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है

    नियमित भक्ति भाव से पाठ करने से सकारात्मक वातावरण बनाने, अच्छे विचारों को बढ़ावा देने और आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायता मिलती है।

दुर्गा चालीसा पाठ की विधि एवं नियम माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और रक्षा की देवी माना जाता है। दुर्गा चालीसा का पाठ श्रद्धा और भक्ति से करना सबसे महत्वपूर्ण है। पूजा को विधिपूर्वक करने के लिए इन सरल नियमों का पालन किया जा सकता है: 1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पाठ से पहले शरीर और मन को स्वच्छ एवं शांत रखें। 2. पूजा का स्थान स्वच्छ करें। माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। 3. दीपक और धूप जलाएं। पूजा आरंभ करने से पहले घी या तिल के तेल का दीपक और धूप जलाकर माँ दुर्गा का स्मरण करें। 4. लाल पुष्प अर्पित करें। माँ दुर्गा को लाल फूल, चुनरी और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। 5. भोग अर्पित करें। माता को फल, मिठाई या अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात्त्विक भोग श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। 6. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। शांत और स्वच्छ स्थान पर आसन लगाकर एकाग्र होकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें। 7. श्रद्धा और एकाग्रता से पाठ करें। प्रत्येक चौपाई का स्पष्ट उच्चारण करें और मन को माँ दुर्गा के स्वरूप एवं नाम में केंद्रित रखें। 8. नवरात्रि और शुक्रवार को विशेष रूप से पाठ कर सकते हैं। नवरात्रि, शुक्रवार या अन्य शुभ अवसरों पर दुर्गा चालीसा का पाठ विशेष श्रद्धा के साथ किया जाता है। हालांकि, इसका पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। 9. पाठ के अंत में प्रार्थना करें। माँ दुर्गा से शक्ति, साहस, सुख-शांति, समृद्धि और जीवन के कष्टों से रक्षा की प्रार्थना करें। विशेष: दुर्गा चालीसा के पाठ के लिए किसी जटिल अनुष्ठान की अनिवार्यता नहीं है। सच्ची श्रद्धा, भक्ति, स्वच्छता और सकारात्मक भाव को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

Frequently Asked Questions

दुर्गा चालीसा का पाठ प्रातः स्नान के बाद करना शुभ माना जाता है। इसे सुबह या शाम किसी भी समय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पढ़ा जा सकता है।

हाँ, दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ किया जा सकता है। प्रतिदिन श्रद्धा से इसका पाठ करने से मन में शक्ति, आत्मविश्वास और भक्ति का भाव बढ़ने में सहायक माना जाता है।

दुर्गा चालीसा का पाठ एक बार भी श्रद्धा से किया जा सकता है। भक्त अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार इसका पाठ एक या अधिक बार कर सकते हैं।

हाँ, महिलाएं भी पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकती हैं। माँ दुर्गा की आराधना सभी भक्तों के लिए की जा सकती है।

हाँ, दुर्गा चालीसा का पाठ घर पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने स्वच्छ और शांत स्थान पर किया जा सकता है।

हाँ, नवरात्रि में माँ दुर्गा की आराधना विशेष रूप से की जाती है। इसलिए इन दिनों दुर्गा चालीसा का पाठ करना विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। हालांकि, इसका पाठ पूरे वर्ष किया जा सकता है।

हाँ, शुक्रवार को माँ दुर्गा की पूजा और दुर्गा चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन विशेष श्रद्धा के साथ माता की आराधना कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ दुर्गा शक्ति और साहस की देवी हैं। श्रद्धा से दुर्गा चालीसा का पाठ करने से भय कम करने और मन में साहस एवं आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायता मिलती है।

हाँ, भक्त अपनी उचित मनोकामना और प्रार्थना के साथ दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं। सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ दुर्गा का स्मरण करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

दुर्गा चालीसा के पाठ के लिए किसी विशेष सामग्री की अनिवार्यता नहीं है। दीपक, धूप, लाल पुष्प, फल और मिठाई आदि अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अर्पित किए जा सकते हैं।

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Durga Chalisa

Kanchan Jadhao / Religious India