Navgrah Chalisa

The Navgrah Chalisa is a Hindu devotional hymn dedicated to the nine celestial deities, collectively known as the Navgrahas. Devotees recite it with faith to seek their blessings, reduce the adverse effects associated with planetary influences, and bring peace, balance, prosperity, and harmony into life.

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Navgrah Chalisa
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Introduction

नवग्रह चालीसा केवल नौ ग्रहों की स्तुति नहीं है, बल्कि यह जीवन में ग्रहों से जुड़ी आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार शांति, संतुलन और सकारात्मकता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ ग्रहों की अनुकूल कृपा प्राप्त करने, ग्रहों से जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने और जीवन की बाधाओं एवं कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना के लिए करते हैं। नियमित रूप से नवग्रह चालीसा का पाठ करने से मन में शांति, धैर्य और आत्मविश्वास का भाव बढ़ने तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता आने में सहायता मिलने की धार्मिक मान्यता है।

Sacred Verses Lyrics & Meaning

1
श्री गणपति गुरुपद कमल,
प्रेम सहित सिरनाय ।
नवग्रह चालीसा कहत,
शारद होत सहाय ॥
2
जय जय रवि शशि सोम बुध,
जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह,
करहुं अनुग्रह आज ॥
3
प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा,
करहुं कृपा जनि जानि अनाथा ।
हे आदित्य दिवाकर भानू,
मैं मति मन्द महा अज्ञानू ।
अब निज जन कहं हरहु कलेषा,
दिनकर द्वादश रूप दिनेशा ।
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर,
अर्क मित्र अघ मोघ क्षमाकर ।
4
शशि मयंक रजनीपति स्वामी,
चन्द्र कलानिधि नमो नमामि ।
राकापति हिमांशु राकेशा,
प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा ।
सोम इन्दु विधु शान्ति सुधाकर,
शीत रश्मि औषधि निशाकर ।
तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा,
शरण शरण जन हरहुं कलेशा ।
5
जय जय जय मंगल सुखदाता,
लोहित भौमादिक विख्याता ।
अंगारक कुज रुज ऋणहारी,
करहुं दया यही विनय हमारी ।
हे महिसुत छितिसुत सुखराशी,
लोहितांग जय जन अघनाशी ।
अगम अमंगल अब हर लीजै,
सकल मनोरथ पूरण कीजै ।
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6
जय शशि नन्दन बुध महाराजा,
करहु सकल जन कहं शुभ काजा ।
दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना,
कठिन कष्ट हरि करि कल्याणा ।
हे तारासुत रोहिणी नन्दन,
चन्द्रसुवन दुख द्वन्द्व निकन्दन ।
पूजहिं आस दास कहुं स्वामी,
प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी ।
7
जयति जयति जय श्री गुरुदेवा,
करूं सदा तुम्हरी प्रभु सेवा ।
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी,
इन्द्र पुरोहित विद्यादानी ।
वाचस्पति बागीश उदारा,
जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा ।
विद्या सिन्धु अंगिरा नामा,
करहुं सकल विधि पूरण कामा ।
8
शुक्र देव पद तल जल जाता,
दास निरन्तन ध्यान लगाता ।
हे उशना भार्गव भृगु नन्दन,
दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन ।
भृगुकुल भूषण दूषण हारी,
हरहुं नेष्ट ग्रह करहुं सुखारी ।
तुहि द्विजबर जोशी सिरताजा,
नर शरीर के तुमही राजा ।
9
जय श्री शनिदेव रवि नन्दन,
जय कृष्णो सौरी जगवन्दन ।
पिंगल मन्द रौद्र यम नामा,
वप्र आदि कोणस्थ ललामा ।
वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा,
क्षण महं करत रंक क्षण राजा ।
ललत स्वर्ण पद करत निहाला,
हरहुं विपत्ति छाया के लाला ।
10
जय जय राहु गगन प्रविसइया,
तुमही चन्द्र आदित्य ग्रसइया ।
रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा,
शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा ।
सैहिंकेय तुम निशाचर राजा,
अर्धकाय जग राखहु लाजा ।
यदि ग्रह समय पाय हिं आवहु,
सदा शान्ति और सुख उपजावहु ।
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11
जय श्री केतु कठिन दुखहारी,
करहु सुजन हित मंगलकारी ।
ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला,
घोर रौद्रतन अघमन काला ।
शिखी तारिका ग्रह बलवान,
महा प्रताप न तेज ठिकाना ।
वाहन मीन महा शुभकारी,
दीजै शान्ति दया उर धारी ।
12
तीरथराज प्रयाग सुपासा,
बसै राम के सुन्दर दासा ।
ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी,
दुर्वासाश्रम जन दुख हारी ।
नवग्रह शान्ति लिख्यो सुख हेतु,
जन तन कष्ट उतारण सेतू ।
जो नित पाठ करै चित लावै,
सब सुख भोगि परम पद पावै ॥
13
धन्य नवग्रह देव प्रभु,
महिमा अगम अपार ।
चित नव मंगल मोद गृह,
जगत जनन सुखद्वार ॥
14
यह चालीसा नवोग्रह,
विरचित सुन्दरदास ।
पढ़त प्रेम सुत बढ़त सुख,
सर्वानन्द हुलास ॥

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  • Brings Peace and Balance / शांति और संतुलन प्रदान करता है

    श्रद्धा और भक्ति से नवग्रह चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलने और जीवन में संतुलन एवं स्थिरता बनाए रखने में सहायता होने की मान्यता है।

  • Reduces Negative Planetary Influences / ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायक

    भक्त नवग्रह देवताओं की कृपा प्राप्त करने और कुंडली में ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति से जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने की प्रार्थना के लिए नवग्रह चालीसा का पाठ करते हैं।

  • Removes Obstacles and Difficulties / बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करने में सहायक

    नियमित रूप से नवग्रह चालीसा का पाठ करने से जीवन की बाधाओं और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए शक्ति और धैर्य प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।

  • Brings Happiness and Prosperity / सुख और समृद्धि प्रदान करता है

    श्रद्धा से नवग्रह चालीसा का पाठ करने से जीवन में शुभता, सुख, समृद्धि और सकारात्मक परिस्थितियों के आने की मान्यता है।

  • Improves Mental Strength / मानसिक शक्ति बढ़ाने में सहायक

    भक्ति भाव से किया गया पाठ जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करते समय धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

  • Brings Relief from Difficulties / कष्टों से राहत दिलाने में सहायक

    धार्मिक मान्यता के अनुसार नवग्रहों की आराधना और नवग्रह चालीसा के पाठ से जीवन में आने वाले विभिन्न कष्टों और परेशानियों से राहत मिलने की कामना की जाती है।

  • Invokes the Blessings of the Navgrahas / नवग्रह देवताओं की कृपा प्राप्त होती है

    नियमित रूप से नवग्रह चालीसा का पाठ भक्तों के लिए सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु - सभी नवग्रह देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक माध्यम माना जाता है।

नवग्रह चालीसा पाठ की विधि और नियम नवग्रह चालीसा का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नवग्रह देवताओं का स्मरण करके उनकी कृपा प्राप्त करना, जीवन में शांति और संतुलन की कामना करना तथा ग्रहों से जुड़े कष्टों को कम करने की प्रार्थना करना है। सामान्य रूप से इसके पाठ के लिए किसी कठिन नियम का पालन करना आवश्यक नहीं है। 1. स्नान करके पाठ करें संभव हो तो सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर नवग्रह चालीसा का पाठ करें। यदि सुबह संभव न हो, तो दिन के किसी भी शांत समय में पाठ किया जा सकता है। 2. पूजा का स्थान स्वच्छ रखें नवग्रह देवताओं की प्रतिमा या चित्र के सामने स्वच्छ स्थान पर बैठें। पूजा के स्थान को साफ रखें और पाठ से पहले कुछ क्षण मन को शांत करके नवग्रह देवताओं का ध्यान करें। 3. दीपक जलाएं पाठ से पहले दीपक जला सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार धूप, पुष्प या अन्य पूजा सामग्री भी अर्पित की जा सकती है। सामान्य पाठ के लिए किसी विशेष सामग्री का होना अनिवार्य नहीं है। 4. नवग्रह देवताओं का ध्यान करें चालीसा शुरू करने से पहले सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — सभी नवग्रह देवताओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। उनसे अपने जीवन में शांति, शुभता और कल्याण बनाए रखने की प्रार्थना करें। 5. चालीसा का पाठ ध्यान से करें नवग्रह चालीसा का पाठ जल्दबाजी में न करें। प्रत्येक पंक्ति को समझते हुए और श्रद्धा के साथ पढ़ें। पाठ के समय मन को अनावश्यक विचारों से हटाकर नवग्रह देवताओं के स्मरण में लगाने का प्रयास करें। 6. नियमित रूप से पाठ करें यदि संभव हो तो प्रतिदिन एक निश्चित समय पर नवग्रह चालीसा का पाठ करें। नियमित पाठ से मन में अनुशासन और भक्ति का भाव मजबूत होता है। किसी विशेष ग्रह से जुड़ी परेशानी होने पर भी श्रद्धा के अनुसार नियमित पाठ किया जा सकता है। 7. शनिवार और विशेष अवसरों पर पाठ धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को विशेष रूप से शनिदेव की आराधना की जाती है। इसके अलावा ग्रहों से संबंधित विशेष तिथियों और अवसरों पर नवग्रहों की पूजा एवं चालीसा पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 8. शुद्ध और सकारात्मक भाव रखें पाठ करते समय मन में श्रद्धा, विनम्रता और सकारात्मक भाव रखना चाहिए। नवग्रह देवताओं से केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति ही नहीं, बल्कि सद्बुद्धि, धैर्य, शांति और सही मार्ग पर चलने की शक्ति की भी प्रार्थना करनी चाहिए। 9. पाठ के बाद प्रार्थना करें चालीसा का पाठ पूरा करने के बाद सभी नवग्रह देवताओं को प्रणाम करें और अपने तथा अपने परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें। विशेष ध्यान दें: नवग्रहों की विशेष पूजा, ग्रह शांति अनुष्ठान और ज्योतिषीय उपायों के अलग-अलग नियम हो सकते हैं। लेकिन सामान्य भक्ति के रूप में नवग्रह चालीसा का पाठ करने के लिए किसी कठिन या विशेष अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा, नियमितता और शुद्ध भाव से किया गया पाठ ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

Frequently Asked Questions

नवग्रह चालीसा का पाठ नौ ग्रहों के देवताओं की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका पाठ ग्रहों से जुड़े कष्टों और अशुभ प्रभावों को कम करने तथा जीवन में शांति, सुख और संतुलन की कामना के लिए किया जाता है।

नवग्रह चालीसा का पाठ सुबह स्नान के बाद या दिन के किसी भी शांत समय में किया जा सकता है। यदि संभव हो तो इसे प्रतिदिन एक निश्चित समय पर पढ़ना अच्छा माना जाता है।

हाँ, नवग्रह चालीसा का पाठ प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जा सकता है। नियमित पाठ से मन में अनुशासन, सकारात्मकता और नवग्रह देवताओं के प्रति भक्ति का भाव मजबूत होता है।

स्नान करके स्वच्छ वस्त्रों में पाठ करना शुभ और उचित माना जाता है, लेकिन यदि किसी कारण स्नान संभव न हो तो केवल इसी वजह से पाठ करना छोड़ना आवश्यक नहीं है। शुद्ध मन और श्रद्धा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाँ, नवग्रह चालीसा का पाठ घर पर स्वच्छ और शांत स्थान में किया जा सकता है। इसके लिए मंदिर जाना अनिवार्य नहीं है।

हाँ, भक्त किसी विशेष ग्रह से जुड़ी परेशानी के समय भी नवग्रह चालीसा का पाठ कर सकते हैं। इसमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु - सभी नवग्रहों का स्मरण किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नवग्रह चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ ग्रहों से जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने और नवग्रह देवताओं की कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। इसे आध्यात्मिक आस्था और प्रार्थना के रूप में समझना चाहिए।

इसके पाठ की कोई एक अनिवार्य संख्या नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार एक बार या अधिक बार इसका पाठ कर सकते हैं। नियमितता और श्रद्धा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाँ, महिलाएँ भी श्रद्धा और भक्ति के साथ नवग्रह चालीसा का पाठ कर सकती हैं। सामान्य चालीसा पाठ के लिए किसी विशेष लिंग-आधारित प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं मानी जाती।

पाठ पूरा करने के बाद नवग्रह देवताओं को प्रणाम करके अपने और अपने परिवार के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की जा सकती है।

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Spiritual Bhakti